9 फ़रवरी 2017


आँचल में सजा लेना कलियाँ जुल्फों में सितारे भर लेना

प्रेषक : धर्मेंद्र कुमार

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आँचल में सजा लेना कलियाँ जुल्फों में सितारे भर लेना 
ऐसे भी कभी जब शाम ढले तब याद हमें भी कर लेना 

आया था यहाँ बेगाना सा कहल दूंगा कहीं दीवाना सा 
दीवाने के खातिर तुम कोई इलज़ाम न अपने सर लेना 

रास्ता जो मिले अनजान कोई आ जाए अगर तूफान कोई 
अपने को अकेला जान के तुम आँखों मे न आंसूं भर लेना
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