9 फ़रवरी 2017


पहले सौ बार इधर और उधर देखा है

प्रेषक : धर्मेंद्र कुमार

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पहले सौ बार इधर और उधर देखा है
तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है

हम पे हँसती है जो दुनियाँ उसे देखा ही नहीं
हम ने उस शोख को अए दीदा\-ए\-तर देखा है

आज इस एक नज़र पर मुझे मर जाने दो 
उस ने लोगों बड़ी मुश्किल से इधर देखा है

क्या ग़लत है जो मैं दीवाना हुआ, सच कहना
मेरे महबूब को तुम ने भी अगर देखा है
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